The Poem – मैंने तो अब चलना सीख लिया, मैंने खुद से मिलना

The Poem – मैंने तो अब चलना सीख लिया

मैंने खुद से मिलना सीख लिया
प्यार भरी बाते करना शुरू किया
यही तो प्रमाण है
की मैंने तो अब चलना सीख लिया

चोट खाकर दुःख तो
अब भी होता है
तमाशा करने के लिये
दिल अब न रोता है
मैंने आंसू पीना सीख लिया
हां यही सच है
मैंने तो अब चलना सीख लिया

क्ष्य से भटकने का
मलाल तो होता है
मायूस होता है दिल
ये हाल भी होता है
पर खुद की तकलीफें सहना
सीख लिया
हा यह सच है
मैने तो अब चलना सीख लिया

निराशा आती तो है
पर उसे रुकना होता है
आशा के सूरज को
फिर उगना होता है
कुछ ऐसे ही अल्फाज़ो में
दर्द को दवा बनाना सीख लिया
हा ये सच है,
मैंने तो अब चलना सीख लिया

ज़िद्दी हूँ न , ज़िद पवित्रता की
कैसे छोड़ सकता हूँ
दलदल में भी कमल का सपना
कैसे तोड़ सकता हूँ
पर थोड़ा धीरज रखना भी
सीख लिया
हा बाबा अब
मैंने तो चलना सीख लिया

ही अब गिरकर हताश होता हूँ,,
उठकर फिर नया प्रयास करता हूँ
अब डर को हराना सीख लिया
यही तो सच है
मैंने तो अब चलना सीख लिया

रूठता हूँ मगर न नाराज़ होता हूँ,
करता हूँ बादे और खुद का
हमराज़ होता हूँ
अब मैंने खुदसे नज़रे मिलाना
सीख लिया
हा यही सच है
मैंने तो अब चलना सीख लिया

जीतूंगा पूरी दुनिया को
यही आस रखता हूँ
मानव हूँ न हर मानव से
प्यार करता हूँ
अब गलती पे अपनी
झुकना सीख लिया
हा यह सच है
मैंने तो अब चलना सीख लिया

समंजस जब भी है
कथनी और करनी में
पर कमी नही विश्वास की
ज्वाला और अग्नि में
चाहे जो हो
मुस्कुराना सीख लिया
हा बाबा
मैंने तो अब
चलना सीख लिया
चलना सीख लिया

धन्यवाद

Note🔴-जीवन मे असफलताओं से घबराइये नही। जब जीवन मे आपके अनुकूल माहौल न हो। तब हिम्मत मत हारिए। चाहे स्थिति जो हो खुद पर से विश्वास मत छोड़िए। आप सूरज की तरह स्थिर रहिए, समस्या रूपी काले बादलों को हटना ही होगा |

            जय माता दी

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Dayanand Kumar Deepak

Dayanand Kumar Deepak is the MD (Managing Director) and CEO (Chief Executive Officer) of biharisir.com and Whole Time Director, Independent Director, Shareholder/Investor Grievance Committee, Remuneration Committee.

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